गीता धामी के मार्गदर्शन से सेवा संकल्प फाउंडेशन ने बनाई अपनी अलग पहचान, सामाजिक उत्थान का बना अडिग स्तंभ
देहरादून : उत्तराखंड, वह पावन धरा,
जहाँ हर पर्वत, हर घाटी, हर बहती नदियाँ,
सेवा और भक्ति की गूँज सुनाती हैं,
वहाँ जब सेवा निस्वार्थ भाव से की जाती है,
तो वह केवल कर्म नहीं, वह इतिहास बन जाती है।
ऐसी ही प्रेरणा और अनुकरणीय आदर्श हैं श्रीमती गीता धामी, जिनके मार्गदर्शन में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन आज उत्तराखंड के सामाजिक उत्थान का एक अडिग स्तंभ बन चुका है।
उन्होंने सेवा को केवल कर्तव्य नहीं,
बल्कि जीवन का संकल्प और धर्म बना लिया। स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, संस्कृति, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हर क्षेत्र में उनका योगदान समाज के हृदय को छूता है।
दूर-दराज़ के गाँवों में निशुल्क चिकित्सा शिविर लगाना,
बीमारों को राहत देना;
माल्टा मिशन और महोत्सव के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाना;
महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, एंब्रॉयडरी जैसी कलाएँ सिखाकर उन्हें स्वावलंबन और आत्मविश्वास देना;
और उत्तरायणी कौथिक जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हमारी लोकसंस्कृति, परंपरा और पहचान को जीवंत रखना, यह केवल योजनाएँ नहीं, करुणा और समर्पण का जीवंत प्रमाण हैं।
सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि सामाजिक परिवर्तन पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि दृष्टि, संवेदनशीलता और समर्पण से आता है।
यह फाउंडेशन उन अनसुनी आवाज़ों की आशा बन चुका है,
ग्रामीण महिलाएँ, किसान, बच्चे और जरूरतमंद परिवार, जिनकी पीड़ा अक्सर नजरअंदाज रह जाती है।
*उत्तराखंड के सामाजिक इतिहास में यह कार्य निश्चित ही एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा*।
श्रीमती गीता धामी का यह सेवा-पथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है:
सच्ची शक्ति, सच्चा सम्मान और असली परिवर्तन केवल सेवा और समर्पण में निहित हैं।
देवभूमि की जनता की ओर से
इस निस्वार्थ सेवा, संवेदनशीलता और अथक समर्पण को सादर नमन।
आपका यह संकल्प उत्तराखंड को और अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और मानवीय बना रहा है।
