राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन मॉक एक्सरसाइज की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित, जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने की विभिन्न आपदा परिदृश्यों की समीक्षा बैठक
पिथौरागढ़ : राज्य में प्रस्तावित आपदा प्रबंधन मॉक एक्सरसाइज (Table Top Exercise/Scenario Based Exercise) की तैयारियों के संबंध में आज आपदा प्रबंधन सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। जनपद पिथौरागढ़ में बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्री आशीष भटगांई ने की। बैठक में जिला आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
बैठक में जनपद पिथौरागढ़ के भौगोलिक एवं संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा मॉक एक्सरसाइज के दौरान विभिन्न विभागों की भूमिका एवं समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रथम परिदृश्य के रूप में मुनस्यारी विकासखंड के धापा गांव में रॉक फॉल एवं शूटिंग स्टोन की घटना पर विचार किया गया। परिदृश्य के अनुसार लगातार भारी वर्षा के कारण पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से आवासीय भवनों, वाहनों एवं गौशालाओं को नुकसान, लोगों के घायल एवं मलबे में दबने तथा गांव का संपर्क मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे समय में त्वरित खोज एवं बचाव अभियान, घायलों का उपचार तथा संवेदनशील परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
दूसरे परिदृश्य में तवाघाट क्षेत्र स्थित राँती पुल के समीप बड़े भूस्खलन की स्थिति प्रस्तुत की गई, जिसमें धारचूला–तवाघाट मार्ग अवरुद्ध होने, कैलाश मानसरोवर एवं आदि कैलाश यात्रा से जुड़े तीर्थयात्रियों, स्थानीय निवासियों एवं पर्यटकों के फंसने तथा विद्युत एवं संचार सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना पर विचार किया गया। इस दौरान राहत एवं बचाव कार्यों, वैकल्पिक व्यवस्थाओं तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
तीसरे परिदृश्य में बारम क्षेत्र में गोरीगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न टो इरोजन (Toe Erosion) के कारण जौलजीबी–मदकोट मोटर मार्ग के क्षतिग्रस्त होने एवं सड़क धंसने की संभावित स्थिति पर विचार किया गया। इसके साथ ही नदी किनारे स्थित आवासीय भवनों, कृषि भूमि, पेयजल योजनाओं एवं विद्युत अवसंरचना पर संभावित प्रभाव तथा प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की तैयारियों की समीक्षा की गई।
चौथे परिदृश्य में कैलाश मानसरोवर एवं आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर भूस्खलन एवं हिमस्खलन की स्थिति प्रस्तुत की गई। इस परिदृश्य में धारचूला–गुंजी–नाभीढांग मार्ग के विभिन्न हिस्सों में सड़क एवं पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने, तीर्थयात्रियों एवं सहायक स्टाफ के फंसने तथा नाभीढांग–लिपुलेख सेक्टर में हिमस्खलन की संभावित घटना के दौरान आईटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं जिला प्रशासन के संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि मॉक एक्सरसाइज को वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों के अनुरूप गंभीरता से संपादित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय बनाए रखते हुए अपने संसाधनों, उपकरणों एवं मानवबल की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को पूर्व निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुरूप अपनी तैयारियां पूर्ण रखने तथा मॉक एक्सरसाइज के दौरान सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
