Friday, August 7, 2026
उत्तराखंड

भारत-नेपाल संस्कृत अनुसंधान सहयोग को नई दिशा, उत्तराखंड ने संभाली अग्रणी भूमिका, नई दिल्ली में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार की मुलाकात

देहरादून/नई दिल्ली : उत्तराखंड ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक और पहल करते हुए नेपाल के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से मुलाकात कर संस्कृत अनुसंधान, शिक्षण और विद्वत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

बैठक में दोनों पक्षों ने संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए संयुक्त शोध, छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई। नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने उत्तराखंड सरकार के संस्कृत संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के सहयोग से संस्कृत शिक्षा और अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

दीपक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। साथ ही, 28 अगस्त को संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् और विभिन्न गुरुकुलों में संगोष्ठियों, व्याख्यानों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) से संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, शिक्षक-छात्र सहयोग और संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में दोनों देशों के युवा शोधार्थियों और विद्वानों को संयुक्त शोध परियोजनाओं तथा संयुक्त प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे।

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