पीएमजीएसवाई ठेकेदारों ने रॉयल्टी पेनाल्टी वापस लेने की करी मांग
देहरादून : पीएमजीएसवाई कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन उत्तराखंड ने ठेकेदारों के बिलों से रॉयल्टी के नाम पर की जा रही अतिरिक्त पेनाल्टी और बिटुमिन की बढ़ी दरों का मामला उठाया है। एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर को खनन एवं औद्योगिक विकास सचिव को मांगपत्र सौंपकर पूर्व में काटी गई अतिरिक्त पेनाल्टी वापस करने और नए पेनाल्टी प्रावधान तत्काल समाप्त करने की मांग की।
एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में चट्टानी पत्थर की खदान उपलब्ध नहीं है। लोक निर्माण विभाग की वर्ष 2023-24 और 2024-25 की अनुसूचित दरों में विकासखंडवार परिवहन की अलग व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध निर्माण सामग्री का उपयोग करने वाले ठेकेदारों पर निर्धारित रॉयल्टी के अतिरिक्त पेनाल्टी लगाना उचित नहीं है।
एसोसिएशन के अनुसार सड़क निर्माण में हिल साइड, फॉर्मेशन, डिफेक्ट और फाउंडेशन कटिंग से निकलने वाले पत्थर का ही उपयोग किया जाता है। पूर्व व्यवस्था में निर्धारित रॉयल्टी ठेकेदारों के बिलों से काटी जाती थी, लेकिन अतिरिक्त पेनाल्टी का प्रावधान नहीं था। एसोसिएशन ने कहा कि नियमों का उल्लंघन कर खनन या परिवहन करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन अनुबंध के तहत नियमानुसार कार्य करने वाले ठेकेदारों पर अतिरिक्त पेनाल्टी लगाना उचित नहीं है।
एसोसिएशन ने रेत, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री पर भी पेनाल्टी को अनुचित बताया। उसका कहना है कि खरीदी गई सामग्री के साथ निर्धारित रॉयल्टी जमा की जाती है और संबंधित दस्तावेज कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद बिलों से अतिरिक्त राशि काटना उचित नहीं है।
ठेकेदारों ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के नाम पर बिलों से काटी जा रही धनराशि वापस करने की भी मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि डीएमएफ की राशि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और क्षतिपूर्ति के लिए होती है, इसलिए निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों के बिलों से इसकी कटौती का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
बिटुमिन की बढ़ी दरों का भुगतान मांगा
एसोसिएशन ने बिटुमिन की कीमतों में हुई वृद्धि का भी मुद्दा उठाया। एसोसिएशन के अनुसार मार्च 2026 के बाद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने से बिटुमिन की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। कई राज्यों में ठेकेदारों को बढ़ी हुई दरों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड में अभी तक इसका समाधान नहीं हुआ है।
एसोसिएशन ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 3.75 मीटर चौड़ी सड़क के लिए करीब पांच लाख रुपये प्रति किलोमीटर की अतिरिक्त राशि देने की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी बढ़ी दरों का भुगतान किया जा रहा है। इसी आधार पर उत्तराखंड में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अनुबंधों में बढ़ी लागत का भुगतान करने की मांग की गई है।
एसोसिएशन ने अनुबंध की एसबीडी की धारा 54.3 का हवाला देते हुए कहा कि आपात परिस्थितियों में विशेष प्रावधान के तहत सरकार बढ़ी हुई बिटुमिन दरों का भुगतान कर सकती है। इससे लंबित सड़क निर्माण कार्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
एसोसिएशन ने सरकार से अब तक काटी गई अतिरिक्त पेनाल्टी वापस करने, नए पेनाल्टी प्रावधान समाप्त करने और लंबित सड़क कार्यों में बढ़ी बिटुमिन दरों का भुगतान करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि बढ़ी दरों का भुगतान संभव नहीं है तो मौजूदा अनुबंधों को बिना पेनाल्टी समाप्त कर नई दरों पर नए अनुबंध किए जाएं। एसोसिएशन ने दोनों मामलों में जल्द आदेश जारी करने की मांग की है।

