उत्तराखंड

महिला समूहों के हाथों कूड़ा शुल्क की कमान, तीन माह में 63 लाख की वसूली

देहरादून : राजधानी में स्वच्छता प्रबंधन को सशक्त बनाने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर करने की दिशा में नगर निगम की पहल रंग ला रही है। नगर निगम देहरादून ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को घर-घर कूड़ा शुल्क संग्रहण की जिम्मेदारी सौंपकर एक अभिनव मॉडल लागू किया है।

शहर के 100 वार्डों में से 57 वार्डों में कूड़ा शुल्क संग्रहण का दायित्व महिला समूहों को दिया गया है। ये समूह त्रैमासिक आधार पर घर-घर जाकर निर्धारित शुल्क एकत्र कर रहे हैं। अभियान के शुरुआती चरण में ही जुलाई, अगस्त और सितंबर माह के दौरान 63 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि कुल मुनाफे का 25 प्रतिशत हिस्सा संबंधित महिला समूहों को दिया जाएगा। इससे महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। निगम का मानना है कि इस कदम से जहां राजस्व में वृद्धि हुई है, वहीं सफाई व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी है।

आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में महिला समूहों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। निर्धारित समय पर शुल्क संग्रहण से निगम की कार्यप्रणाली में सुधार आया है और व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनी है।

सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह चौहान ने कहा कि त्रैमासिक प्रणाली के तहत तीन माह का शुल्क एकमुश्त लिया जा रहा है। अब तक 63 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जिसमें से 25 प्रतिशत राशि महिला समूहों को प्रदान की जाएगी।
वार्ड 64 नेहरूग्राम की समूह सदस्य सीमा बिष्ट ने योजना को महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से कई महिलाओं को स्थायी आय का माध्यम मिला है।

नगर निगम का यह मॉडल स्वच्छता, पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। इससे शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत हुई है।

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