उत्तराखंड

‘‘महिला कार्मिकों को बाल्य देखभाल अवकाश अवधि का पूर्ण वेतन दिया जाना नारी सम्मान होगाः दीपक जोशी”

देहरादून : राज्याधीन सेवाओं में कार्यरत महिला कार्मिकों को अनुमन्य 02 वर्ष के बाल्य देखभाल अवकाश (Child Care Leave) के शासनादेश दिनांक 01.06.2023 में वित्त विभाग द्वारा लगायी गयी शर्त व प्रतिबंध के अन्तर्गत दूसरे वर्ष में बाल्य देखभाल अवकाश का उपभोग करने की स्थिति में 80 प्रतिशत वेतन ही दिये जाने तथा महिला कार्मिकों के वेतन से इस एवज में 20 प्रतिशत की कटौती किये जाने के विरूद्ध  सचिवालय संघ के पूर्व अध्यक्ष दीपक जोशी द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित करते हुये महिला कार्मिको के हितों के विपरीत निर्गत आदेश को संशोधित किये जाने की पुरजोर मांग की गयी है।

जोशी द्वारा लिखे पत्र में पूर्व में वित्त विभाग एवं अन्य स्तरों पर उनके द्वारा महिला कार्मिकों के इस महत्वपूर्ण व संवेदनशील प्र्रकरण में किये गये अनुरोध को दोहराते हुये भारत सरकार द्वारा की गयी व्यवस्था से इतर उत्तराखण्ड राज्य की पर्वतीय व भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुये भारत सरकार में स्थापित व्यवस्था से इतर भी यहां की परिस्थितियों के अनुरूप पृथक नियम बनाये जाने ज्यादा श्रेयष्कर व व्यवहारिक होने तथा प्रदेश की मातृ शक्ति कार्मिकों की व्यवहारिक कठिनाई को देखते हुये ही उनके सम्मान में राज्य सरकार द्वारा 02 साल के बाल्य देखभाल अवकाश (Child Care Leave) की व्यवस्था लागू किये जाने की स्थिति का संज्ञान कराते हुये इस व्यवस्था का सम्पूर्ण लाभ व पूर्ण वेतन महिला कार्मिकों को दिये जाने का अनुरोध करते हुये उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय राज्य होने की स्थिति व महिला कार्मिकों की भावनाओं व मुख्यमंत्री जी से इस मांग को पूर्ण कराये जाने की अपेक्षा को देखते हुये वित्त विभाग के विरोधाभासी एवं महिला कार्मिकों के हितों के विपरीत की गयी व्यवस्था को दुरूस्त कराते हुये तदनुसार 20 प्रतिशत कटौती के प्राविधान को निरस्त करते हुये द्वितीय वर्ष के दिनों में भी पूर्व की भांति शत्-प्रतिशत वेतन अनुमन्य किये जाने के सामान्य प्राविधान निर्गत करने की मांग की गयी है तथा प्रकरण को महिला कार्मिकों के सेवा हित में आगामी कैबिनेट में रखे जाने का अनुरोध पुनः किया गया है।

जोशी द्वारा अवगत कराया गया है कि पूर्व में भी उनके द्वारा प्रभावित महिला कार्मिकों के शिष्टमण्डल के साथ इस सम्बन्ध में अपर मुख्य सचिव वित्त आनंद वर्धन से सार्थक वार्ता की गयी थी तथा उनके द्वारा प्रकरण को शीघ्र ही उत्तराखण्ड राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप मंत्रीमण्डल के पुर्नविचार हेतु प्रस्तुत किये जाने का लिखित निर्देश अपने अधीनस्थ अधिकारियों को दिया गया था, परन्तु 06 माह का समय व्यतीत होने के उपरान्त भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण जोशी द्वारा वर्तमान में उनके सचिवालय संघ का प्रतिनिधित्व न किया जाना बताया गया। इसके साथ जोशी द्वारा यह भी जोड़ा गया कि यदि महिला कार्मिकों के इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द ही कोई सार्थक निर्णय वित्त विभाग के सक्षम अधिकारियों द्वारा नहीं लिया जाता है तो आवश्कता पड़ने पर प्रभावित महिला कार्मिकों की भावनाओं के अनुरूप महिला सहयोगी साथियों के शिष्टमण्डल के साथ भारी संख्या में मुख्यमंत्री के समक्ष प्रभावित कार्मिकों की बात पुरजोर तरीके से रखी जायेगी तथा इस मांग को पूर्ण किये जाने हेतु लोक तांत्रिक तरीके से अपनी बात को उजागर रखा जायेगा।

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