उत्तराखंड

30वें ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य आगाज़ , राज्यपाल ने कहा कि दिव्य कला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच

देहरादून : राजधानी देहरादून के रेंजर्स मैदान में रविवार को 30वें ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने कहा कि दिव्य कला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में दिव्यांगजन निर्णायक शक्ति साबित होंगे।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि मेले में प्रदर्शित रचनात्मकता आत्मनिर्भर भारत की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचारों को दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों का सेतु बताते हुए कहा कि तकनीक किसी में भेदभाव नहीं करती। उन्होंने आह्वान किया कि यहां निर्मित उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए, ताकि दिव्य प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत आधार तैयार किया है। उन्होंने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India (ALIMCO) के माध्यम से सहायक उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए 375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। अब तक देशभर में आयोजित 29 दिव्य कला मेलों में 2362 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। रोजगार मेलों में 3131 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव प्राप्त हुए।

सांसद टिहरी माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कहा कि दिव्य कला मेला सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। उन्होंने पैरालंपिक खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। विधायक खजान दास ने आयोजन को दिव्यांगजनों के सम्मान और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देने वाला बताया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक प्रदीप ए. ने बताया कि यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को बाजार, वित्त और रोजगार से जोड़ने का समग्र प्रयास है। यहां सहायक उपकरणों के लिए पंजीकरण, विभिन्न योजनाओं की जानकारी और रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है।

21 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले इस नौ दिवसीय मेले में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी भाग ले रहे हैं। लगभग 90 स्टॉल में हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने और उपहार सामग्री प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

26 फरवरी को विशेष रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा, जबकि 1 मार्च को ‘दिव्य कला शक्ति’ नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित इस मेले में प्रवेश निःशुल्क है। आयोजन कला, आत्मनिर्भरता और सम्मान के समावेशी संदेश के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त मंच प्रदान कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *