उत्तराखंड

भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन को लेकर NHAI की सफाई, कहा- भ्रामक है पेड़ों की अंधाधुध कटाई के दावे, पर्यावरण संरक्षण हमारी प्राथमिकता, हाथियों के लिए अंडरपास

देहरादून : भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी सोशल मीडिया और कुछ समाचारों में किए जा रहे दावों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने विस्तृत स्पष्टिकरण जारी किया। एनएचएआई ने कहा कि परियोजना में आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है तथा वृक्षों की कटाई को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं।

एनएचएआई के देहरादून पीआईयू के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। वन क्षेत्र में सड़क के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) को 60 मीटर से घटाकर 23 मीटर किया गया है, ताकि अतिरिक्त वन भूमि प्रभावित न हो। परियोजना में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास, छह बॉक्स कल्वर्ट और 13 पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रतिपूरक वनीकरण, वन्यजीव राहत योजना तथा मिट्टी एवं जल संरक्षण योजनाओं के लिए एनएचएआई ने 6.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई है। वहीं, प्रतिपूरक वनीकरण और उसके 10 वर्षों तक रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। राज्य सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की है।

परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं। प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों का वैज्ञानिक पद्धति से प्रत्यारोपण किया जाएगा, जबकि शेष का नियमानुसार प्रबंधन होगा।

एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत वृक्षों की कटाई किए जाने के दावे निराधार हैं। सौरभ सिंह ने कहा कि इस संबंध में दायर अवमानना याचिका को उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। परियोजना का कार्य सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त होने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए ही किया जा रहा है।

एनएचएआई ने कहा कि भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश परियोजना सतत विकास का उदाहरण है, जिसमें आधुनिक सड़क निर्माण के साथ वन संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को समान महत्व दिया गया है।

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